I, Brahm, and The universe - मैं, ब्रह्म और ब्रह्मांड

 


वायु (air)

हम सभी एक ही वायु ग्रहण करते हैं और उसे प्राण के रूप में पहचानते हैं। क्योकि हम स्वयं को तथा दूसरों को अलग अलग पहचानते हैं इसीलिए हम प्राण वायु को भी - ये उसका प्राण हैँ  ये मेरा प्राण हैँ इतियादि रूप में वर्णित करते हैं। हालांकि प्राण वायु सिर्फ एक ही हैं। ठीक इसी प्रकार आत्मा भी सिर्फ एक ही हैं और वही हर जगह व्याप्त हैं। वहीं एक आत्मा समस्त जीवदेहों  (जीवों की देहों) को धारण करे हुए हैं और वही एक आत्मा सभी प्रकट, अप्रकट एवं निर्जीव स्वरूपों का मूल कारण हैं। अर्थात सभी उसे के स्वरुप हैं उसी एक आत्मा ने स्वयं को नाना प्रकार के स्वरूपों में व्यक्त किया हैं। इसीलिए ये समस्त ब्रम्हांड उस एक आत्मा का ही अनुभवजन्य स्वरुप हैं। 

जिस तरह वस्त्र हमारी व्यक्तिगत पहचान व्यक्त नहीं करते है ठीक उसी प्रकार ये निरंतर परिवर्तित होने वाला शरीर हमारी पहचान नहीं हो सकता हैं। क्योकि किसी भी जीव की पहचान उस व्यबहारिक अनुभव के द्वारा होती हैं जो समय के साथ अपरिवर्तित रहता हैं। जैसे मछली तैरती हैं, पक्षी उड़ता हैं इतियादी इन जीवो के अपरिवर्तित व्यवाहर हैं। उसी प्रकार प्रेम, निडरता, संतोष और विवेक आत्मा के अपरिवर्तनीय गुण हैं जिन्हे समस्त जीवों में आसानी से अनुभव किया जा सकता हैं अतः आत्मा ही हमारी मूल पहचान हैं। क्योंकी आत्मा सिर्फ एक हैं इसीलिए हम सभी जीव, जल, अग्नि, वायु, आकाश, धरती, और ये समस्त ब्रह्माण्ड एक ही हैं। अर्थात हम स्वयं ही ब्रह्म और ब्रह्माण्ड हैं। 

***

वृक्ष (tree)

विविध आकार और रंगों की पत्तियां, फूल, फल, शाखाएं, तना और जड़ें - एक वृक्ष के अभिन्न अंग हैं। हालांकि ये सभी अंग एक ही कोशिका से निर्मित होते हैँ और दूर से देखने पर एक जैसे ही दिखायी पड़ते है लेकिन पास से देखने पर उनकी विशिष्टता स्पष्ट हो जाती हैं। रूप के समान इन सभी अंगो के कार्य भी अलग अलग होते हैं जैसे जड़ें जमीन के अंदर की ओर गति करती हैं जबकि फल, फूल, पत्ती, शाखाएं इत्यादि जमीन से बहार की तरफ वृद्वि करती हैं। इतना तो सभी जानते हैं यहाँ पर नया क्या हैं? नया हैं मनुष्य का दृष्टिकोण जो पेड़ की असल पहचान से एकदम भिन्न हैं। 

[Leaves, flowers, fruits, branches, stems and roots of diverse shapes and colors - are integral parts of a tree. Although all these organs are made from the same cell and are seen to be the same when viewed from a distance, but when viewed from a distance, their specificity becomes clear. Like the form, the functions of all these organs are also different as the roots move towards the ground while fruits, flowers, leaves, branches etc. grow from the ground towards the outside. 

So much everyone knows what is new here? There are new human attitudes which are completely different from the original identity of the tree.]

सोचो की अगर एक पेड़ की पत्तियां आपस में जिरह करे की उनमे से श्रेष्ठ कौन हैं। हरी पत्तियां स्वयं को श्रेष्ठ बताये क्योंकि उनका कार्य भोजन बनाना हैं। रंगबिरंगी पत्तियां अपनी श्रेष्ठटा सुंदरता के आधार पर सिद्ध करें। बड़ी पत्तियां अपनी श्रेष्ठटा आकर के आधार पर, तथा छोटी पत्तियां अपनी श्रेष्ठटा कोमलता के आधार पर सिद्ध करें। टूटी-फटी पत्तियां अपने जीवन के सँघर्ष को आधार बना कर अपनी श्रेष्ठटा सिद्ध करें। यहाँ तक की एक ही जैसे रूप एवं कार्य करने वाली पत्तियां के बीच भी एक दूसरे से श्रेष्ठटा करने की होड़ लग जाये तो? 

सोचो,अगर पत्तियां की तरह फल,फूल,शाखाएं, तना और जड़ें भी एक दूसरे से श्रेष्ठटा की होड़ में लग जाये तो? और वो सभी निर्णय के लिए आपके पास आये, तब आप किसके पक्ष में निर्णय देंगे और क्यों ?

[Think if the leaves of a tree cross-examine who among them are the best. Green leaves describe themselves as superior because their function (cooking) is most important. Colorful leaves prove their superiority on the basis of beauty. Larger leaves prove their superiority on the basis of their superiority, and smaller leaves based on their softness. Broken leaves prove your superiority by basing the struggle of your life. Even if there is a race between the leaves of the same form and function to do better than each other? Think, if the fruits, flowers, branches, stems and roots like leaves also compete with each other in the competition of superiority? And they all came to you for decision, then in whose favor would you decide and why?]

एक दृष्टिकोण से देखा जाये तो इन सभी की बात सही भी लगती है क्योकि पेड़ की वृद्धि में सभी का योगदान अभूतपूर्ण रहता हैं। हलाकि कुछ दृष्टिकोणों में शाखाओ, पत्तियों एवं जड़ों का योगदान विशिष्ट लगता हैं फिर भी उनमे से किसी एक को नहीं चुना जा सकता हैं।  और पत्तियों के समूह में से किसी एक को श्रेष्ठ बताना तो नामुमकिन ही नही मूर्खतापूर्ण कार्य भी हैं।  पड़ गए ना चक्कर में ? इसी दुविधा को मैंने प्रकरण के आरम्भ में "नया हैं मनुष्य का दृष्टिकोण जो पेड़ की असल पहचान से एकदम भिन्न हैं" के रूप में उल्लेख किया था। 

[If we look at it from one point of view, all these things also seem correct because everyone's contribution to the growth of the tree remains unprecedented. Although in some approaches the contribution of branches, leaves and roots seems to be specific, yet none of them can be selected. And to say that one of the group of leaves is superior is not only impossible but also a foolish act. Did you feel dizzy? I mentioned this dilemma at the beginning of the episode as "new is the attitude of man which is completely different from the real identity of the tree".]

असल में पत्तियां, फल, फूल, शाखाएं, तना और जड़ें इतियादी का स्वयं कोई अलग अस्तित्व ही नहीं हैं, बल्कि ये सब मूल अस्तित्व पेड़ के विभिन्न अंगो के नाम हैं।  जिसका कोई अस्तित्व नहीं है उसकी पैमाइश नहीं की जा सकती हैं। 

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