रूप और रंग की महफ़िल

इश्क़ में हूँ या ज़िन्दगी की मझधार में हूँ ?

सनम और साहिल के बिना, मैं न इज़हार में हूँ न ही इंकार में हूँ। 


1.    ज़ी लेते है तुम्हे अपना समझ कर, वरना बेगानी सी इस ज़िन्दगी में क्या ही हमारा है। 

2.    मुस्कराती भी है गुनगुनाती भी है, 
       कभी कभी दर्द भी छुपाती है ये आँखे 
       जहाँ जुबां भी साथ न दे, वो हकीकत भी बयां कर जाती है ये आँखे।

3.    क्या कहूँ तुमसे, कुछ समझ नहीं आता।
       इन एहसासो का ज़िक्र-ए-हाल बयां करना मुझे नहीं आता।
       बस यूं ही खुश रह लेता हूँ स्वयं को तुममें पाकर, 
       जैसे किसी बेघर को अपना आशियाना मिल गया हो कहीं।    

4.    तुम्हारे एहसासो में एक अजब सी ताज़गी है, जैसे ज़िन्दगी की कोई कहानी हो 
       जिसे भूल आया था में कहीं, उस दास्तान-ए-इश्क़ की कोई निशानी सी है। 

5.    कौन हो तुम, कहाँ से आयीं हो,
       यूं इस कदर, दिल-ए-महफ़िल में छायी हो।
       हवा के झोंके में कोई खुशबु हो जैसे,
       पल दो पल महकाने इस ज़िन्दगी को,
       अपने साथ तुम ये सपने अनगिनत लायी हो।

6.    ख़ुद खुदा हो या खुदा की इबादत हो,
       समझ नहीं आता कि सज़दा करूं या इक़रार करूँ।

7.    इन आँखों में प्यार भी है शरारतें भी हैं,
       किसी के ख़यालो में की गई इबादतें भी है।
       ये मैं नहीं जानता कौन है वो खुशनसीब,
       जिसने आपके दिल में यूँ दस्तक दी है।
       (जिसने आप से ये हिमाकत की है।)

8.    ये ज़ुल्फ़ है या काली घटाएं हैं
       जो इस चाँद से चेहरे को छुपाये है,
       गिराते हुए बिजलियाँ इन अक्शों से,
       ये किसी मेहबूब के लिए प्यार से की गयीं अदाएं हैं।

9.    ये प्यार भरी आँखें मन को मदहोश करती है,
       उतर कर इस दिल में ये शोर बहुत करती हैं।
       सोचता हूँ डूब ही जाऊ मय के इन प्यालों में,
       कर दूं अपनी हस्ति नीलाम गुलाबी होंठो के इन मयखानों में।

10.    चाँद से इस रोशन चेहरे में, मुझे खुदा का नूर नज़र आता है। 
         करता हूँ तुझे अपनी बंदिगी अता, हे खुदा, 
         मुझे तुझमें अपने मेहबूब का हुस्न-ए-सुरूर नज़र आता है।

11.    समंदर हूँ मैं, बूँद भी हूँ,
         तुम्हीं में हूँ तुमसे दूर भी हूँ।

         मैं तो तुम्हारे हर एहसास में शामिल हूँ
         मुश्किलें हो या खामिया, तुम्हारी हर रज़ा में शामिल हूँ।
         क्यों सोचती हो यूं अकेला छोड़ दूंगा तुम्हें ?
         अरे पगली,
         तुम्हारे भीतर और बाहर,
         हर अंदाज़ में, मैं ही मैं शामिल हूँ। 

12.    शायरी शब्दों से नहीं, एहसासों में होती है।
         (क्योंकि)
         मोहब्बत हुस्न से नहीं, जज्बातों में होती है।

13.    ये जज्बात है इसीलिए धीरे धीरे जाएंगे,
         रह रह कर इस दिल में, ये खुद को तड़पायेंगे।

14.    एहले दिल सनम एक ही होता है,
         बस उसका एहसास बदलता रहता है।
         खता नहीं है ये आँखों की,
         यह तो नाखुश मन है
         जो मेहबूब के मिलने पर भी,
         मेहबूब की तलाश में भटकता रहता है।

15.    खामोश है जिंदगी इस कदर आज,
         जैसे पतझड़ में गुलशन मुस्कुराना भूल गए हो।

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