Enlightenment - Who we are?

मानव जीवन, एक से अधिक व्यक्तित्व का सम्मिलित अनुभव है। ये सभी व्यक्तित्व निम्न प्रकार जाने जाते है :-

हमारा शरीर एक व्यक्तित्व है जिससे हमे भौतिक संसार का अनुभव होता हैं। 
हमारी बुद्धि एक व्यक्तित्व हैं जो हमे तार्किक संसार का अनुभव करवाती हैं।
हमारी इक्क्षाएँ हमारे मानसिक शरीर अर्थात 'मन व्यक्तित्व' को व्यक्त करती हैं।

जिस पल हम अपने आपको इन तीनो व्यक्तित्वों से पृथक जान लेते हैं, उसी पल से हमारी आत्मज्ञान की यात्रा आरम्भ हो जाती हैं।।


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हमारी 'आत्मा' आनंद स्वरूप है, जो स्थायी और सतत नवीन आनंद का श्रोत हैं।
हमारा मन 'आनंद' का प्रेमी हैं, इसीलिए वह निरंतर 'आनंद' की खोज करता रहता हैं।

जिस प्रकार एक प्रेमी, प्रेम की अभिलाषा में, अपना सबकुछ, प्रेयषी को समर्पित कर देता हैं ठीक उसी प्रकार प्राणी का 'मन' भी 'आनंद' की अभिलाषा में अपना सर्वस्व समर्पित करने को सदा ही सज्ज रहता हैं। जिस किसी भी कार्य, व्यक्ति या वस्तु से 'मन' को 'आनंद' की अनुभूति प्राप्त होती हैं तब प्राणी सुख का अनुभव करता हैं और जब 'मन ' को 'आनंद' की अनुभूति नहीं होती हैं या 'आनंद का अनुभव' कुछ समय पश्चात समाप्त हो जाता है तब प्राणी दुःख का अनुभव करता हैं। प्राणी की सभी इक्क्षाएँ, आसक्तियां और महत्वकांछाये, 'मन' की इसी 'आनंद' प्राप्त करने की अभिलाषा के कारण होती हैं।

'आत्मा' की तरह इस संसार से भी प्राणी को 'आनंद' की प्राप्ति हो जाती हैं चूँकि ये संसार नश्वर है इसी कारणवश संसार से प्राप्त 'आनंद' भी कुछ समय पश्चात स्वतः ही नष्ट हो जाता हैं और 'आनंद' के आभाव में प्राणी का 'मन' व्यथित रहता हैं। वो आनंद पुनः प्राप्त करने के नए-नए अवसर देखता रहता हैं, योजनाए बनता रहता हैं और इसी कारणवश इस संसार में उलझा रहता हैं....और समय के साथ ये जीवन समाप्त हो जाता हैं।

'आत्मज्ञानी' जब अपने 'आंनद स्वरुप' को जान लेता हैं तब उसका 'मन' इस सतत आनंद में स्थिर रहता हैं। 'मन' के स्वतः समर्पण से प्राणी की सभी इच्छाओ और आसक्तियों का स्वतः नाश हो जाता हैं। प्राणी के 'मन' का सतत 'आनंद स्वरुप' को प्राप्त कर लेना ही मोक्ष कहलाता हैं। यहीं परम पुरुषार्थ हैं एवं प्राणीमात्र का अधिकार हैं।

जीव, जब संसार की नश्वरता को जान लेते है तब उसका सांसारिक सुखों/कर्तव्यों से लगाव/मोह खत्म हो जाता हैं।



=========================Know Yourself ====================================

Human life is the combined experience of more than one personality. All these personalities are known as follows: -

Body (Karak shareer): Take desicion using senses

Intelligence (Karan shareer): Take desicion using facts and logical reasoning

Mind (Suchma shreer): Take desicion to fulfill Wish or pleasures.

We love our friends, family & work because we get pleasure by doing that. We love everything that give us pleasure because we love ourself.
We love our wife, childreans because loving them we(mind & body) experience pleasure. Our expectation(for pleasure) motivates us for future planning. Experiencing eternal pleasure is our habit because we are the PLEASURE in TRUESELF.   
When you understand that you are not your mind, body or intelligence but more...you are on self-discovery path..to know truely who you are.

Once a human accepts the impermanence (mortality) of the Universe, then he gets free from earth's pleasures,luxuries,delight.

By REMEMBERING(Knowing) EVERY TIME that everything in this world is mortal and temporary, humans can easily escape from universal affairs. Live FREELY from the affection of Body, Mind and Intellect.

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